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कन्नौज में PDA सम्मेलन को लेकर सियासी घमासान, खाली कुर्सियों पर बीजेपी ने घेरा सपा को

October 19, 2026 Source: Hamaar-CG

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कन्नौज में PDA सम्मेलन को लेकर सियासी घमासान, खाली कुर्सियों पर बीजेपी ने घेरा सपा को
कन्नौज में समाजवादी पार्टी के PDA कार्यकर्ता सम्मेलन में खाली कुर्सियों का वीडियो सामने आने के बाद सियासी हलचल तेज हो गई. अखिलेश यादव के संसदीय क्षेत्र में आयोजित इस कार्यक्रम के बाद पार्टी ने कन्नौज की पूरी जिला इकाई भंग कर दी. संगठन में इस कार्रवाई को लेकर चर्चा है. इससे पहले एटा, कासगंज और गोरखपुर में भी सपा संगठन पर कार्रवाई हो चुकी है. समाजवादी पार्टी की ओर से हमेशा बीजेपी का मख़ौल इसलिए भी उड़ाता रहता है कि अक्सर उनकी सभाओं में भीड़ नहीं जुटती, बड़े नेताओं की सभाओं में कुर्सियां खाली रह जाती हैं. लेकिन पहली बार अखिलेश यादव को एहसास हुआ कि उनका कार्यकर्ता उनके पीछे पागल हैं ना की पार्टी के पीछे. हुआ दरअसल ये कि समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष श्यामलाल पाल ने कन्नौज में पीडीए कार्यकर्ता सम्मेलन बुलाया, यह सम्मेलन भी कहीं किसी ग्राउंड में नहीं बल्कि पार्टी दफ्तर में बुलाया गया. स्टेज सजा. सैकड़ों की तादाद में कुर्सियां लगी. नेता और कार्यकर्ता बुलाए गए. लेकिन कार्यक्रम पूरी तरीके से फ्लॉप हो गया. सिर्फ कार्यक्रम ही फ्लॉप नहीं हुआ बल्कि इस कार्यक्रम के वीडियो सोशल मीडिया पर खूब ट्रेंड करने लगे. इस वीडियो में साफ दिख रहा था कि जिले के सभी नेता और पदाधिकारी मंच पर बैठे थे और मंच के सामने और मंच के सामने लगी कुर्सियां खाली थी. जितने लोग मंच पर थे उससे आधे भी इस कार्यक्रम में कुर्सियों पर नहीं बैठे थे. जैसे ही PDA कार्यकर्ता सम्मेलन की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर चलने लगे पार्टी में हड़कंप मच गया. वजह थी कन्नौज में हुआ यह कार्यक्रम. माना जाता है कन्नौज अखिलेश यादव के दिल के बेहद करीब है. अखिलेश यादव और डिंपल यादव दोनों पहली बार और बार बार यहां से सांसद हुए. अखिलेश यादव तो अभी भी कन्नौज से ही सांसद हैं लेकिन कार्यकर्ताओं ने यहां अखिलेश के अलावा पार्टी के कार्यक्रम को कोई तवज्जो नहीं दी. उन्हें लगता है की चूंकि अखिलेश यादव से वह सीधे जुड़ते हैं, अखिलेश यादव के वहां से सांसद होने के नाते ज्यादातर नेता और कार्यकर्ता अखिलेश यादव से डायरेक्ट टच में होते हैं. वह खुद को दूसरे जिलों के कार्यकर्ताओं से थोड़ा विशेष मानते हैं. ऐसे मे उनके लिए अखिलेश यादव ही समाजवादी पार्टी है. ऐसे में जब प्रदेश अध्यक्ष श्यामलाल पाल PDA कार्यकर्ता सम्मेलन करने पहुंचते हैं तो नेताओं ने इसे हल्के में ले लिया. खुद तो कार्यक्रम में पहुंचकर मंच पर बैठ गए लेकिन आम लोगों और कार्यकर्ताओं को जुटाने की कोई कोशिश नहीं की, जिससे उनका यह सम्मेलन फ्लॉप हो गया और पार्टी की खूब किरकिरी हो रही है. इससे खफा पार्टी ने तत्काल न सिर्फ कन्नौज की पूरी पार्टी इकाई भंग कर दी बल्कि कन्नौज से जितने नेता अलग-अलग पार्टी के पदों पर मौजूद है सब की छुट्टी कर दी गई. बीजेपी के नेताओं ने कन्नौज के इस वीडियो को हाथों-हाथ लिया और सभी यह कहने लगे कि अखिलेश यादव के लिए PDA तो सिर्फ जुमला है PDA की जनता तो हमारे साथ है. अखिलेश यादव को यह भी नहीं भाया कि उनके मौजूद नहीं होने पर उनके प्रदेश अध्यक्ष की कोई हैसियत ही नहीं है. कन्नौज के सभी कार्यकर्ताओं को पार्टी के सभी पदों से मुक्त करके अखिलेश यादव ने एक संदेश अपने कार्यकर्ताओं तक भेजा है कि कोई कितना भी करीब क्यों ना हो लेकिन पार्टी के अनुशासन से बड़ा कोई नहीं है. यह कोई पहली बार नहीं है जब अखिलेश यादव ने अपने किसी जिले की इकाई को भंग किया है इसके पहले एटा और कासगंज के दो बड़े नेताओं जिसमें योगेंदर सिंह यादव ने अखिलेश यादव के सामने जब अपना दबदबा दिखाया बहसबाजी की तो अखिलेश यादव को लग गया की एटा और कासगंज के अलग पावर सेंटर यह नेता बन चुके हैं और अपनी मर्जी से जिले का संगठन चलाना चाहते हैं टिकट दिलाना चाहते हैं तो इन दोनों जिलों एटा और कासगंज को भी भंग कर दिया गया था. पार्टी दफ्तर में अखिलेश के सामने हुई यह बदतमीजी भी सोशल मीडिया पर वायरल हुई थी इसके बाद अखिलेश यादव ने दोनों जिलों की पूरी इकाई भंग कर दी थी. सबसे पहले गोरखपुर की समाजवादी पार्टी की इकाई को भंग किया गया क्योंकि पार्टी के कार्यक्रम में ही समाजवादी पार्टी के ठाकुर नेता ने समाजवादी पार्टी के ही निषाद नेता को सरेआम थप्पड़ से पीट दिया जिसका वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ और फिर गोरखपुर कि सपा इकाई भंग कर दी गई. अखिलेश यादव लगातार जिलों में कड़ी कार्रवाई कर मैसेज देने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन शायद उनके मैसेज को अलग-अलग जिलों में नेता और कार्यकर्ता समझ नहीं पा रहे यही वजह है कि अब अखिलेश यादव को पूरे पूरे जिले की इकाई को भंग करना पड़ रहा है.